देवी का मायालोक
नमश्कार दोस्तो आज हम फिर हाजिर है आप के सामने ले कर एक चमत्कारी मंदिर देवी काली का मंदिर जहां देवी खुद प्रकट होती है !
आज हम आप को बताने वाले है दिल्ली से 300 किलोमीटर दूर पर स्थित उत्तराखंड के टिटिहरी जिले के गाँव की !
जहाँ ये मान्यता है कि देवी काली खुद यहाँ प्रकट होती है ! हमको भी इसके बारे में सुन कर आश्चर्य लगा फिर हम निकल लिए अपनी खोज पर !
देवी कालिका
दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर उत्तराखंड में स्थिति टिटिहरी जिले में स्थित कालिका मंदिर की है बात मंदिर में स्थित एक डोली की है !
ऐसा माना जाता है कि रविवार के दिन श्रद्धालुओं का आना जाना यहाँ लगा रहता है कहा जाता है कि देवी यहाँ एक डोली में आती है !
जिसके कारण डोली अपने आप हरकत करने लगती है ! और उसके पूजा समाप्त होने के बाद यहाँ के पुजारी के अंदर देवी प्रवेश होता है
रविवार के दिन देवी के दोपहर के पूजा के बाद डोली अपने आप हरकत में आ जाती है और दीवाल पर लिख कर भक्तो का दुख दर्द बताती है !
ओर आश्चर्यजनक बात तो एक ओर है पूजा खत्म होने के बाद जब यहाँ के पुजारी के अंदर देवी का प्रवेश होता है !
क्या कभी आपने चावल में अंकुर फूटते देखा है ! देखने की बात तो छोड़िए सुना तक नही होगा जल्दी परन्तु देवी के इस माया लोक नगरी में ये एक चमत्कार ही है !
पूजा खत्म होने के बाद ढोल नगाड़े की आवाज शांत होने के बाद जब पुजारी उस डोली पर सिर रख कर देवी को प्रणाम करता है !
उसके तुरंत कुछ समय बाद पुजारी के अंदर देवी कालिका प्रवेश होता है ! ऐसा कहा जाता है मगर हमने वहाँ पर ये देखा कि जैसे ही पुजारी डोली को अपना सिर लगा कर प्रणाम करता है !
उसके अंदर देवी का प्रवेश होते ही एक ओर चमत्कार होता है पुजारी के हाथों में चावल के दाने रखते है ! फिर उसपर दूध डाला जाता है फिर मुट्ठी बन्द हो जाती है !
और फिर मुट्ठी खुलते ही उस चावल के दानों पर अंकुर फूटे हुवे थे ! जब हमने अपनी आँखों से देखा फिर हम भी दंग रहे गए और हमने लोगो की आस्था को ध्यान में रखते हुवे इस खोज को वही पर ही समाप्त कर दिए !

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