नमश्कार दोस्तो आज हम फिर हाजिर है एक देवी का सदियों पुराना रहस्य को लेकर !
देवी छिन्मस्तिका जिन्हे कई लोग सर कटी देवी भी बोलते है ! उन्ही से जुड़ा रहस्य आप के सामने हम आपको बताने है !
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देवी छिन्नमस्ता !
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आज हम आप को बताने वाले है एक ऐसा राज जिसे कलयुग में माँ भगवती ने दर्शन दिए एक ऐसी देवी जिन्होंने अपनी योगिनियों को उनकी भूक मिटाने के लिए अपना सिर काट के रक्त पान कराया था !
ओर एक ऐसा मंदिर जो सदियो से अपने आप मे एक रहस्य छुपाये बैठा है ! तो आज हम उस मंदिर और मंदिर से जुड़े रहस्य आप के सामने लाने वाले है !
और वो राजा कौन था जिसे देवी भगवती छिन्मस्तिका ने शक्षात दर्शन दिये वो रहस्य भी आप के सामने लाने वाले है !
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छिन्मस्तिका मंदिर रजरप्पा
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भारत के एक राज्य झारखंड के जिले रांची से करीबन 75 किलोमीटर दूर स्थित है रारप्पा !
ओर रजरप्पा में स्थित है ! ये भव्य मंदिर भगवति छिन्मस्तिका का ओर इस मंदिर से कई जुड़े रहस्य है ! जो हम आप को आज बताने वाले है ?
इस मंदिर का रहस्य सदियो पुराना है ! लोगो की मान्यताओं के अनुसार रजरप्पा नाम के राजा और रानी को माता भगवती ने पानी मे साक्षात दर्शन दिए ओर पुत्री रत्न का वरदान दिया था !
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देवी छिन्मस्तिका !
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राजा के पीछे जुड़ी कहानी तो आप को बताने वाले है ! मगर मंदिर से जुड़े कुछ राज ओर रहस्य आप को बताते है ! देवी छिन्मस्तिका एक महाविद्या है ! महाविद्या में छिन्मस्तिका का स्थान 5 वां है !
मंदिर के बारे में कहा जाता है ! कि ये अष्टभुजी मंदिर है ! इसका निर्माण स्वयम भगवान विश्वकर्मा जी ने अपने हाथों से किया था ! एक ही शिला पत्थर को ले कर बनाये इस मंदिर के आस पास 7 मंदिर है !
सातो मंदिरो में देवो देवताओ की अलग अलग प्रतिमा है ! इस मंदिर के निर्माण को ले कर के पूरा विज्ञान ओर विशेषग्यो में मतभेद है ! मगर धार्मिक मान्यताओं की माने तो मंदिर 6000 साल पहले बनी है !
कुछ श्रद्धालु तो इसे महाभारत से जुड़ी माँ कमाख्या मंदिर से भी जोड़ कर मानते है ! लेकिन इसमें कोई शक नही की असम की माँ कमाख्या मंदिर के बाद ये दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठों में से एक है !
ये सब बात करने से पहले हम आप को इस मंदिर की कुछ रहस्यो से रूबरू करते है मंदिर का द्वार पूरब मुखी है ! मंदिर के सामने ही बलि देने का प्रवधान है ! रोजाना यहाँ 200 से अधिक बकरो की बली दी जाती है ! मगर आश्चर्यजनक बात तो यह है !
कि रोजाना इतनी बलि ओर इतने रक्त फैलने के बाद भी आप को इस मंदिर परिसर में जल्दी मक्खी देखने नही मिलेगी आप को आस पास ओर अपने पास मक्खी दिखे गी मगर जहाँ बली दी जाती है ! वहाँ पर आप को एक भी मक्खी नही दिखेंगी क्यो कहते है !
इसे चमत्कारी क्यो तंत्र साधनाओ की मंदिर कहते है ! उसकी वजह है ! मंदिर से जुड़ा है !
एक शिला पत्थर इस शीला पत्थर जब लोग अपनी मन्नतें मांगते है ! ईस मंदिर में तो उसे एक पत्थर बांधते है ! धागे से ओर जब उनकी मन्नते पूरी होती है ! तब इस पत्थर को आकर निकाल कर संगम में फेकना पड़ता है !
ओर मंदिर के दक्षिण साइड में लग कर एक कुंड भी है जिसे पाप नाशिनी कुंड भी कहा जाता है ! कहते है इस कुंड में नहाने के बाद रोगी रोग मुक्त हो जाता है !
मंदिर की दीवार 8 फिट गहरी है मंदिर में यज्ञ कुंड अग्नि कुंड वायु पांचो प्रकृति के पांच तत्व के प्रतीक माने जाते है ! मंदिर के पास दामोदर के द्वार पर एक सीढ़ी है !
उस सीढ़ी का अस्तित्व करीब दशको पुराना है ! इस सीढ़ी के पास तंत्र मंत्र और सिद्धि साधना के लिए लोग दुनिया के कई कोनो से आते है ! और अपनी साधना में सफल होते ही है !
दोस्तो यह था इस मंदिर की जुड़ी मान्यताओं का रहस्य हम आप को आगे भी ऐसे कई मंदिर स्थान के बारे में आप को बताते रहेंगे !
! धन्यवाद दोस्तो फिर मिलते है अपनी आने वाली पोस्ट कमाख्या मंदिर के रहस्यो को लेकर के !
! कॉमेंट कर के आप हमको जरूर बताइयेगा आप को हमारी ब्लॉग्स कैसी लगी !
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